कुम्हारों एवं माटी कला के कारीगरों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, कौशल विकास एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से जिला उद्योग केंद्र कोटद्वार में “परम्परा से प्रगति की ओर” थीम पर विशेष जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कारीगरों को सरकारी योजनाओं, ऋण सुविधाओं, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, स्वरोजगार, बाजार एवं प्रचार-प्रसार तथा नवाचार एवं आधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई।
माटी कला बोर्ड की उपाध्यक्ष अनुराधा ध्यानी वालिया ने कारीगरों को पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक एवं बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि माटी कला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आधुनिक तकनीक व बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़कर कारीगर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
अतिथियों ने कारीगरों को पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ आधुनिक डिजाइन, तकनीक एवं विपणन माध्यम अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सोमनाथ गर्ग ने कहा कि माटी कला उत्तराखण्ड की समृद्ध पारंपरिक विरासत है। कारीगरों को विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाना, उनकी कला को बाजार से जोड़ना और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं माटी कला से जुड़े कारीगर उपस्थित रहे।
