
पांच दिवसीय ग्रीष्मोत्सव में राष्ट्र निर्माण, युवा जागरण और वैदिक संस्कृति पर हुआ व्यापक मंथन
देहरादून, 17 मई। तपोवन नालापानी स्थित वैदिक साधन आश्रम में 13 से 17 मई 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय ग्रीष्मोत्सव वैदिक यज्ञ, ऋग्वेद पारायण, योग साधना, भजन-प्रवचन और राष्ट्र निर्माण के संदेशों के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन आचार्य हरि प्रसाद जी (हैदराबाद) एवं आचार्य जगदीप जी (देहरादून) के सान्निध्य में हुआ। पांच दिनों तक आश्रम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, भजनों और आध्यात्मिक चेतना से गुंजायमान रहा।
ग्रीष्मोत्सव का शुभारंभ 13 मई को प्रातःकालीन यज्ञ एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य हरि प्रसाद जी ने यज्ञ की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए 33 कोटि देवताओं के वैदिक पूजन की विधि समझाई तथा सभी को दैनिक यज्ञ अपनाने के लिए प्रेरित किया। वानप्रस्थ आश्रम हरिद्वार के आचार्य शैलेश मुनि सत्यार्थी जी ने यज्ञ को आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम बताया।
इसके पश्चात आयोजित प्रवचन सत्र में ब्रह्मा जी ने ऋग्वेद मंत्रों के माध्यम से जीवन जीने की कला पर प्रकाश डाला। गुरुकुल द्रोणस्थली की वेदपाठी कन्याओं प्रतिभा आर्या, सुलक्ष्णा, ऋद्धि एवं सिद्धि ने वेदपाठ एवं शांतिपाठ प्रस्तुत कर वातावरण को वैदिकमय बना दिया।
राष्ट्र निर्माण और युवा जागरण पर हुआ मंथन
ग्रीष्मोत्सव के द्वितीय सत्र में “आर्षग्रंथों में राष्ट्र निर्माण के सूत्र” विषय पर विशेष चर्चा हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभा शास्त्री जी ने भजन प्रस्तुति से किया। कार्यक्रम अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्त जी के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
स्वामी योगेश्वरानंद जी ने रोगों की औषधियों, स्वास्थ्य संरक्षण और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि संस्कारित एवं स्वस्थ युवा ही राष्ट्र की सच्ची शक्ति हैं। स्वामी सत्यव्रतानंद जी ने राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सामूहिक सहयोग और संस्कारों की आवश्यकता पर बल दिया।
आचार्य आशीष जी ने “राष्ट्र” और “देश” के अंतर को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति एवं वैदिक विचारधारा से जुड़ने का संदेश दिया। तपोवन विद्या निकेतन के विद्यार्थियों ने भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
दोपहर के बाद सायंकालीन यज्ञ एवं संध्या का आयोजन हुआ। इसके बाद आचार्या डॉ. सुनीति वेदरत्नशाब्दिकी ने राष्ट्र निर्माण एवं वैदिक जीवन मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। भजनोपदेशक रमेश चंद्र स्नेही (लक्सर), पंडित दिनेश पथिक, रोशनी आर्या (दिल्ली) एवं श्वेता कटारिया ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात्रिकालीन सत्र का समापन शयनकालीन मंत्रों के पाठ से हुआ।
महिला सम्मेलन में नारी शक्ति और संस्कारों पर चर्चा
15 मई को आयोजित महिला सम्मेलन “नारी अपने घर को वैदिक धर्मी कैसे बनाए” विषय पर केन्द्रित रहा। कार्यक्रम का संचालन पुष्पा गुसाई ने तथा अध्यक्षता अरोड़ा माता ने की। भावना राणा ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
आचार्या डॉ. अन्नपूर्णा जी ने कहा कि नारी ही परिवार एवं समाज की मूल शक्ति है। उन्होंने वैदिक संस्कारों के माध्यम से परिवार निर्माण पर बल दिया। आचार्य जगदीप जी की पुत्रियों आराध्या एवं आर्येशा ने मां पद्मिनी की गाथा कविता के माध्यम से प्रस्तुत की। आचार्या डॉ. सुनीति ने बच्चों के संस्कार एवं सफलता के सूत्रों पर विस्तार से चर्चा की।
सायंकालीन सत्र में माता स्नेहलता खट्टर की अध्यक्षता में महिला की समाज निर्माण में भूमिका पर विचार व्यक्त किए गए। वीणा आहूजा ने प्रेरणादायक प्रवचन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विजय कुमार आर्य, सुधीर कुमार माटा, कुलदीप चौहान, अशोक वर्मा, डॉ. अजय पाल, माता सत्यवती एवं माता कांता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पहाड़ी शाखा में गूंजे वैदिक विचार और भजन
16 मई को ग्रीष्मोत्सव का आयोजन आश्रम की पहाड़ी शाखा में हुआ। यज्ञ एवं प्रातःराश के बाद आयोजित भजन-प्रवचन सत्र की अध्यक्षता स्वामी सत्यव्रतानंद जी ने की।
भजनोपदेशक दिनेश पथिक एवं रमेश चंद्र स्नेही ने ईश्वर भक्ति से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी। आचार्य आशीष जी ने लगभग डेढ़ घंटे तक ईश्वर भक्ति, ध्यान और साधना पर प्रवचन दिया। स्वामी योगेश्वरानंद जी ने वैदिक जीवन पद्धति को आधुनिक जीवन के लिए आवश्यक बताया।
गुजरात से आए युवा वक्ता कृतेश आर्य ने वैदिक परंपरा में प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता और तार्किक चिंतन की महत्ता पर प्रभावशाली वक्तव्य दिया। शांति पाठ के उपरांत श्रद्धालुओं ने सुशील भाटिया एवं जितेंद्र तोमर के नेतृत्व में पदयात्रा भी निकाली।
दोपहर बाद आयोजित सत्र में इतिहासकार राजेश आर्य ने भारत की स्वतंत्रता में स्वामी दयानंद सरस्वती की भूमिका पर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ प्रकाश डाला। इस अवसर पर ‘आर्योदय’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
रात्रिकालीन भजन संध्या में रोशनी आर्या ने भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए। रमेश चंद्र स्नेही ने “जिसको घर में हो प्यार” तथा दिनेश पथिक ने “प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो” जैसे भजनों से वातावरण भक्तिमय बना दिया। श्वेता कटारिया ने भी राम भक्ति से जुड़े भजन प्रस्तुत किए।
समापन समारोह में विद्वानों का सम्मान
17 मई को प्रातः 7 बजे वैदिक यज्ञ एवं ऋचाओं के गान के साथ अंतिम दिवस का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुधीर कुमार माटा ने की, जबकि योगराज अरोड़ा विशिष्ट अतिथि रहे। संचालन आचार्य जगदीप एवं गुरुकुल पौंधा के स्नातक देवेंद्र शास्त्री ने किया।
मुख्य वक्ता आचार्य आशीष जी ने वैदिक जीवनशैली को जीवन जीने की सर्वोत्तम कला बताते हुए कहा कि वैदिक चिंतन व्यक्ति को आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता है। आचार्या अन्नपूर्णा जी ने मातृशक्ति को समाज निर्माण की धुरी बताया। युवा वक्ता आचार्य डॉ. धनंजय जी ने वैदिक पद्धति को समाज उत्थान का श्रेष्ठ माध्यम बताया।
समापन अवसर पर आचार्य हरि प्रसाद जी ने सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों को आशीर्वाद दिया। आश्रम की ओर से सभी विद्वानों एवं अतिथियों को शॉल एवं दक्षिणा देकर सम्मानित किया गया।
उपस्थित प्रमुख विद्वान एवं श्रद्धालु
ग्रीष्मोत्सव में आचार्य हरि प्रसाद, आचार्य आशीष, आचार्य डॉ. धनंजय, आचार्या अन्नपूर्णा, आचार्या डॉ. सुनीति वेदरत्नशाब्दिकी, स्वामी सत्यव्रतानंद, स्वामी योगेश्वरानंद, कृतेश आर्य, शैलेश मुनि सत्यार्थी, प्रतिभा आर्या, सुलक्ष्णा, ऋद्धि, सिद्धि, दिनेश पथिक, रमेश चंद्र स्नेही, ब्रह्मचारी ऋषभ, डॉ. उमेश, ब्रह्मचारी महेंद्र, ब्रह्मचारी हार्दिक, वेदवसु शास्त्री, प्रेमप्रकाश शर्मा, सुरेश गुप्ता, हरीश मुनि, सुरेंद्र कुमार छिब्बर, राममूर्ति, माता जगवती चौधरी, माता संगीता, माता ओकेश चौहान, माता रक्षा आर्या, माता इंदु, माता धवन, बृजेश गर्ग, सतवीर, वीणा, अरविंद, मंजीत, मनीष एवं ब्रह्मचारी श्रुतांत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
